भूमि रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े का आरोप, पीड़ित महिला ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

भूमि रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े का आरोप, पीड़ित महिला ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

भूमि रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े का आरोप, पीड़ित महिला ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार

वर्षों से राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने का दावा, कहा— मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर हो कार्रवाई

बलौदाबाजार-भाटापारा/पलारी। जिले के ग्राम बटगन निवासी सुनीता शर्मा ने अपनी भूमि के राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से फर्जीवाड़ा कर अन्य व्यक्तियों का नाम दर्ज किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को आवेदन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सुनीता शर्मा के अनुसार ग्राम बटगन, पटवारी हल्का नंबर 20, राजस्व निरीक्षक मंडल गिरपुरी, तहसील पलारी में उनकी भूमि स्थित है। आवेदन में खसरा नंबर 265/17 रकबा 0.1010 हेक्टेयर, 473/3 रकबा 0.0830 हेक्टेयर और 541/53 रकबा 0.2100 हेक्टेयर का उल्लेख किया गया है। तीनों खसरों का कुल रकबा करीब 0.3940 हेक्टेयर बताया गया है।

पीड़िता का दावा है कि पुराने खसरा पांचसाला, किसान पुस्तिका एवं अन्य राजस्व अभिलेखों में भूमि से संबंधित उनके अधिकार की प्रविष्टियां मौजूद हैं। इसके बावजूद उनकी जानकारी और सहमति के बिना ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। आवेदन में उपलब्ध ऑनलाइन नामांतरण प्रकरण में वर्तमान भूमिस्वामी के रूप में “सुनीता” और प्रस्तावित भूमिस्वामी के रूप में “भगवती” का उल्लेख होने की बात कही गई है।

30 मार्च 2025 को नामांतरण निरस्त होने का उल्लेख

आवेदन में दावा किया गया है कि ऑनलाइन विवरण में अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण आवेदन के कारण 30 मार्च 2025 को नामांतरण निरस्त किए जाने का उल्लेख है। महिला ने सवाल उठाया है कि ऐसी स्थिति में यदि इसके बाद भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए कि यह बदलाव किस आदेश, दस्तावेज, आवेदन और वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर किया गया।

सुनीता शर्मा ने मांग की है कि मामले की जांच केवल वर्तमान ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर न की जाए, बल्कि मूल मिसल अभिलेख, बी-1, खसरा पांचसाला, किसान पुस्तिका, नामांतरण पंजी, नामांतरण आवेदन एवं आदेश, नोटिस तामीली, कथित सहमति पत्र, हस्ताक्षर, रजिस्ट्री/विलेख सहित ऑनलाइन रिकॉर्ड में हुए बदलाव की डिजिटल हिस्ट्री और लॉग भी जांचे जाएं।

चार साल की बेटी, वर्षों से न्याय के लिए भटकने का दावा

महिला ने आवेदन में अपनी चार वर्षीय बेटी का जिक्र करते हुए कहा है कि वर्षों से राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाते हुए अकेले अपने अधिकार के लिए लड़ना कठिन हो गया है। उन्होंने मामले के कारण मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानी का सामना करने की बात भी कही है।

आवेदन में महिला ने अत्यधिक निराशा व्यक्त करते हुए आत्मदाह जैसे विचार आने और “न्याय दो या आत्मदाह की अनुमति दो” जैसी स्थिति महसूस होने की बात लिखी है। साथ ही शासन से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और भूमि प्रकरण का तत्काल समयबद्ध निराकरण करने की मांग की गई है।

रिकॉर्ड सुरक्षित करने और डिजिटल हिस्ट्री की जांच की मांग

पीड़िता ने कलेक्टर स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम से जांच, तीनों खसरों के पुराने एवं वर्तमान मूल राजस्व अभिलेख सुरक्षित रखने, ऑनलाइन रिकॉर्ड में हुए प्रत्येक बदलाव की डिजिटल हिस्ट्री की जांच और कथित सहमति, आवेदन या हस्ताक्षर की सत्यता की जांच की मांग की है। जांच पूरी होने तक संबंधित भूमि में नया नामांतरण, हस्तांतरण अथवा राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव रोकने की मांग भी आवेदन में की गई है।

महिला ने कहा है कि यदि जांच में फर्जीवाड़ा, कूटरचना अथवा अनधिकृत रिकॉर्ड परिवर्तन सामने आता है तो जिम्मेदार व्यक्तियों और संलिप्त अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए तथा गलत या अवैधानिक प्रविष्टियों को निरस्त कर भूमि रिकॉर्ड को नियमानुसार पूर्ववत किया जाए।