राहुल गांधी की हिन्दू धर्मशास्त्र विरोधी मानसिकता, असत्य प्रचार एवं भ्रम छोड़ें

राहुल गांधी की हिन्दू धर्मशास्त्र विरोधी मानसिकता, असत्य प्रचार एवं भ्रम छोड़ें

राहुल गांधी हिन्दू धर्मशास्त्र विरोधी मानसिकता, असत्य प्रचार एवं भ्रम छोड़ें

— शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

रायपुर। पुणे में आयोजित अपने कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा हिन्दुओं के प्रमुख धर्मशास्त्र मनुस्मृति तथा सनातन सांस्कृतिक विचारों को लेकर दिए गए बयान पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का बयान उनकी घोर अज्ञानता, सतही समझ और सनातन परंपरा के प्रति दुर्भावनापूर्ण मानसिकता को उजागर करता है।

शंकराचार्य ने कहा कि राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए प्राचीन धर्मशास्त्रों के श्लोकों को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत करना न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान है, बल्कि समाज को भ्रमित करने का प्रयास भी है। उन्होंने कहा कि किसी भी शास्त्रीय कथन को उसके मूल संदर्भ, भाषा, व्याकरण और तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में समझना आवश्यक है।

संरक्षण और दायित्व का विधान

उन्होंने कहा कि जिस श्लोक “पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने...” का राहुल गांधी ने उल्लेख किया, उसे स्त्री की परतंत्रता के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। शास्त्रीय दृष्टि से इसमें परिवार और समाज द्वारा स्त्री की सुरक्षा, सम्मान और भरण-पोषण के दायित्व की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत में ‘रक्षति’ का मूल अर्थ रक्षा करना अथवा संरक्षण करना है। इसे जबरन नियंत्रण या अधिकार छीनने के अर्थ में प्रस्तुत करना शास्त्रीय संदर्भ को विकृत करना है।

सनातन परंपरा में नारी का सम्मान

शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में नारी को केवल आश्रित के रूप में नहीं, बल्कि शक्ति, ज्ञान और सृजन की आधारशिला के रूप में सम्मान दिया गया है। भारतीय वाङ्मय में गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषी महिलाओं का उल्लेख मिलता है।

उन्होंने कहा कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” जैसी भारतीय सांस्कृतिक अवधारणाएं नारी के सम्मान को सर्वोच्च स्थान देती हैं। सनातन परंपरा का मूल भाव संघर्ष नहीं, बल्कि परिवार और समाज में परस्पर दायित्व, सम्मान एवं पूरकता का रहा है।

मनुस्मृति को भाजपा से जोड़ना निराधार

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा भारतीय जनता पार्टी को मनुस्मृति से जोड़कर प्रस्तुत करना भी तथ्यहीन और राजनीतिक भ्रम पैदा करने वाला प्रयास है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत का शासन भारत के संविधान के अनुसार चलता है, किसी प्राचीन धर्मशास्त्र के आधार पर नहीं।

उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक नैरेटिव को मजबूत करने के लिए किसी राजनीतिक दल को जबरन मनुस्मृति का समर्थक बताना जनता को भ्रमित करने के समान है।

बार-बार शास्त्रों पर टिप्पणी से बचें राहुल गांधी

शंकराचार्य ने कहा कि राहुल गांधी को हिन्दू धर्मशास्त्रों और सनातन परंपरा पर टिप्पणी करने से पहले उनके मूल ग्रंथों का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना पूर्ण शास्त्रीय अध्ययन और संदर्भ की जानकारी के धर्मग्रंथों पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को हिन्दू धर्मशास्त्रों तथा सनातन जीवन-दृष्टि के संबंध में असत्य एवं भ्रामक प्रचार से बचना चाहिए। यदि इसी प्रकार की टिप्पणियां जारी रहती हैं तो सनातन समाज वैचारिक और लोकतांत्रिक तरीके से इसका मुखर विरोध करता रहेगा।

शंकराचार्य ने कहा कि धर्मग्रंथों पर राजनीतिक बहस करने के बजाय उनके मूल स्वरूप, संदर्भ और शास्त्रीय अर्थ को समझना चाहिए। सनातन परंपरा के विषय में किसी भी प्रकार की टिप्पणी ज्ञान, अध्ययन और तथ्य के आधार पर ही होनी चाहिए।