बारिश ने बढ़ाया ताजियादारों का हौसला, जुलूस में गूंजी ‘या हुसैन’की सदा

बारिश ने बढ़ाया ताजियादारों का हौसला, जुलूस में गूंजी ‘या हुसैन’की सदा
बारिश ने बढ़ाया ताजियादारों का हौसला, जुलूस में गूंजी ‘या हुसैन’की सदा
 
शहर की तमाम मस्जिदों और घरों में पढ़ी गई दुआएं 
आशूरा, रक्तदान, लंगर और सबील सहित तमाम सेवाकार्य रहे जारी
 

भिलाई। करबला के शहीदों की याद में शहर में यौमे आशूरा शुक्रवार को परम्परागत ढंग से मनाया गया। मस्जिदों और घरों में जहां लोगों ने दोपहर में खास तौर पर दुआए आशूरा पढ़ी, वहीं ताजियादारी,सवारी और अखाड़ा मुख्य जुलूस की रौनक रहे। जगह-जगह लंगर और सबील के जरिए खिदमते खल्क (मानव सेवा) का पैगाम दिया गया। वहीं विभिन्न कमेटियों की ओर से रक्तदान की भी पहल की गई।
यौमे आशूरा का जुलूस दोपहर बाद पावर हाउस ओवर ब्रिज पर इकट्ठा होना शुरू हुआ। इस दौरान जम कर बारिश होने लगी। लोग बारिश में भीगते हुए करबला के शहीदों की याद में ‘या हुसैन’की सदा बुलंद करते रहे। इस दौरान अखाड़े में हैरतअंगेज करतब दिखाते नौजवान आगे बढ़ते रहे।  यहां से शाम को जुलूस सेक्टर-1 से सेंट्रल एवेन्यू और सेक्टर-5 चौक होते हुए रात में सेक्टर-6 मस्जिद तक पहुंचा। इसके बाद देर रात जुलूस करबला मैदान जीई रोड पहुंचा, जहां फातिहा ख्वानी के बाद लोग सुबह तक घर लौटे।

मुहर्रम के 10 वें दिन यौमे आशूरा पर शहर की सभी मस्जिदों में दोपहर के वक्त नमाजे जुहर के बाद मिल कर दुआए आशूरा पढ़ी गई। वहीं मस्जिदों, इमामबाड़ों और ताजिया निकलने के रास्ते में जगह-जगह लंगर और सबील का इंतजाम किया गया था। छत्तीसगढ़ मुस्लिम फ्रंट की ओर से इमाम हुसैन की याद में रक्तदान शिविर और आम लंगर का आयोजन जामा मस्जिद सेक्टर-6 भिलाई में किया गया। जिसमें बड़ी तादाद में लोगों ने भागीदारी दी। इधर करबला कमेटी की ओर से भी करबला मैदान में राहगीरों के लिए शरबत की सबील का इंतजाम किया गया। वहीं कमेटी ने जुलूस की व्यवस्था देख रहे पुलिस अफसरों का इस्तकबाल किया।
इसके पहले ताजिए का जुलूस शहर की परंपरा अनुसार 25-26 जून की दरमियानी रात पावर हाउस चौक पर इकट्‌ठा हुआ। कैम्प, खुर्सीपार, फरीद नगर, सुपेला और सेक्टर क्षेत्र के तमाम ताजिया, अखाड़ा और सवारी की कमेटियां जुलूस के तौर पर पावर हाउस पहुंचे। जहां अखाड़े के करतब नौजवानों ने दिखाए। वहीं फातिहा ख्वानी हुई और सुबह-सुबह सभी कमेटियां वापस अपने अपने इमामबाड़े पहुंची। जहां से शुक्रवार दोपहर बाद मुख्य जुलूस के लिए सभी रवाना हुए और देर रात करबला मैदान पहुंचे।