माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती पर राष्ट्रपति करेंगी ₹200 के स्मारक सिक्के और विशेष डाक टिकट का अनावरण

माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती पर राष्ट्रपति करेंगी ₹200 के स्मारक सिक्के और विशेष डाक टिकट का अनावरण

माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती पर राष्ट्रपति करेंगी ₹200 के स्मारक सिक्के और विशेष डाक टिकट का अनावरण

रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित लगभग 300 वर्ष प्राचीन आध्यात्मिक पीठ शदाणी दरबार की पंचम पीठाधीश पूज्य माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में 22 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु रायपुर स्थित लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में माता साहिब हासी देवी जी के सम्मान में ₹200 के स्मारक सिक्के तथा एक विशेष स्मारक डाक टिकट का अनावरण करेंगी।

विश्वभर में बसे सिंधी समाज के लिए यह अवसर हर्ष, गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतीक है। शदाणी दरबार के नवम एवं वर्तमान पीठाधीश्वर संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा सिंधी समाज की महान आध्यात्मिक विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी किया जाना समाज के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि शदाणी दरबार सदैव परोपकार, मानव सेवा, सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, भक्ति, ज्ञान और विश्व कल्याण के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। दरबार की यह गौरवशाली परंपरा आज भी समाज को सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दे रही है।

कोलकाता टकसाल में तैयार हो रहा है ₹200 का स्मारक सिक्का

प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री सुधीर लूणावत, बीकानेर ने बताया कि माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में जारी होने वाला ₹200 मूल्यवर्ग का स्मारक सिक्का भारत सरकार की कोलकाता टकसाल में तैयार किया जा रहा है।

इस सिक्के का कुल वजन 35 ग्राम होगा। इसमें 50 प्रतिशत चांदी, 40 प्रतिशत तांबा, 5 प्रतिशत निकल और 5 प्रतिशत जस्ता का मिश्रण रहेगा। यह स्मारक सिक्का माता साहिब हासी देवी जी के आध्यात्मिक योगदान और सिंधी समाज की गौरवशाली विरासत को सम्मानित करने वाला एक महत्वपूर्ण स्मृति-चिह्न होगा।

लगभग 300 वर्ष पुराना है शदाणी दरबार का इतिहास

शदाणी दरबार का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा हुआ है। इसके संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। वर्ष 1768 में वे सिंध क्षेत्र के मठेलो पहुंचे। इसके बाद उन्होंने हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां प्रज्वलित की गई पवित्र धूनी साहिब आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में धमतरी रोड पर लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में शदाणी दरबार तीर्थ विकसित किया गया। 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने इसकी नींव रखी।

वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल जी शदाणी दरबार के नौवें पीठाधीश्वर के रूप में आध्यात्मिक परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। दरबार में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ मानव सेवा, परोपकार और समाज कल्याण के अनेक कार्य किए जाते हैं।

सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक गौरव का अवसर

माता साहिब हासी देवी जी की 200वीं जयंती पर स्मारक सिक्के और विशेष डाक टिकट का अनावरण न केवल उनकी आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्रदान करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी सिंधी समाज की समृद्ध धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह आयोजन शदाणी दरबार की गौरवशाली परंपरा, माता साहिब हासी देवी जी के योगदान और विश्वभर में फैले सिंधी समाज की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्मृति में स्थान दिलाने वाला ऐतिहासिक अवसर बनेगा।