स्पीकर ओम बिरला पर अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में कांग्रेस ! : सफलता की उम्मीद नहीं

कांग्रेस स्पीकर ओम बिरला पर अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में

नई दिल्ली — बजट सत्र के दौरान संसद में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बढ़ते टकराव के बीच कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी तेज कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए राहुल गांधी को अपना भाषण पूरा करने से रोका, जिससे लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन हुआ। इसके अलावा कोरोना के बाद संसद में बढ़े तनाव के चलते विपक्ष का गुस्सा और गहरा गया है। 

विपक्ष यह भी दावा कर रहा है कि यदि स्पीकर नियमों का पक्षपातपूर्ण इस्तेमाल कर रहे हैं तो उन्हें हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाना चाहिए। हालांकि संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार इस प्रस्ताव को सूचीबद्ध करने से पहले कम से कम 14 दिन का नोटिस और 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं — जिसके लिए विपक्ष के पास सैद्धांतिक तौर पर विधायक संख्या मौजूद है। लेकिन इसे लोकसभा में पास कराना आसान नहीं होगा। क्योंकि संसद में ruling alliance (सरकार) के पास स्पष्ट बहुमत है और सदन में यह प्रस्ताव पास नहीं हो पाएगा। यही कारण है कि राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम प्रतिष्ठा और सियासी दबाव दिखाने के लिए है, न कि हटाने के लिए। (विश्लेषण समाचार रिपोर्ट पर आधारित)

 इतिहास में अविश्वास प्रस्ताव का रिकॉर्ड (स्पीकर/सरकार)

भारत की संसद में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के मामले बेहद दुर्लभ हैं। संविधान के तहत स्पीकर को हटाने के लिए सदन में सरल बहुमत से मंजूरी आवश्यक होती है, लेकिन यह बहुत मुश्किल रहा है। 

 पूर्व के मामलों का अनुभव:

पहला प्रस्ताव (1954): लोकसभा के पहले स्पीकर जी.वी. मावलंकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश हुआ, लेकिन सदन ने इसे खारिज कर दिया। 

1966: स्पीकर सरदार हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव आया, लेकिन सदन ने समर्थन नहीं दिया और प्रस्ताव नहीं उठ सका। �

1987: स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, जो भी अस्वीकृत हो गया। 

 मतलब यह कि अब तक तीन बार लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने के बावजूद उन्हें हटाने में विपक्ष असफल रहा है। 

कांग्रेस एवं विपक्ष स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं, लेकिन संसदीय संख्या और प्रक्रियाओं के कारण पारित होने की संभावना कम है। 

इतिहास से पता चलता है कि स्पीकर्स के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कभी सफल नहीं हुए — तीनों मामलों में अस्वीकृत या नहीं उठ paya

इस कदम का उद्देश्य राजनीतिक संदेश देना और सरकार पर दबाव बनाना अधिक है, बजाए कि तुरंत हटाना। 

अब देखने वाली बात यह है कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ कांग्रेस और विपक्ष द्वारा लाया जाने वाला अविश्वास प्रस्ताव सफल होता है या असफल |