समान नागरिक संहिता पर चर्चा - लिव-इन संबंधों की मान्यता समाप्त हो - छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज 

समान नागरिक संहिता पर चर्चा - लिव-इन संबंधों की मान्यता समाप्त हो - छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज 

*समान नागरिक संहिता के 13 में से 11 बिंदुओं पर छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज की सहमति

विवाह, भरण-पोषण और उत्तराधिकार संबंधी प्रावधान सही 

लिव-इन संबंधों के कानून पर जताई असहमति - लिव-इन संबंधों की मान्यता रद्द की जाय - सुखबीर सिंह सिंघोत्रा 

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज समान नागरिक संहिता (न्ब्ब्) समिति के प्रदेश कार्यालय में पहुंचकर समिति के सदस्यों से मुलाकात की तथा समान नागरिक संहिता के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रतिनिधिमंडल ने विवाह पंजीयन, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत सहित विभिन्न बिंदुओं पर अपने विचार रखे और कुछ प्रावधानों को लेकर अपनी असहमति भी स्पष्ट रूप से व्यक्त की। बैठक में समिति के सदस्य सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार तथा सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा के साथ नरेंद्र सिंह हरगोत्रा एवं स्वर्ण सिंह चावला ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से चर्चा में भाग लिया।

चर्चा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विवाह पंजीयन की व्यवस्था पहले से प्रचलित है। इसी प्रकार, वैवाहिक संबंधों में मतभेद अथवा अलगाव की स्थिति में भरण-पोषण के लिए न्यायालय जाने तथा न्यायालय द्वारा परिस्थितियों के अनुसार भरण-पोषण निर्धारित करने की व्यवस्था भी पहले से मौजूद है। ऐसे में समान नागरिक संहिता के अंतर्गत इन विषयों पर प्रस्तावित प्रावधानों से किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

    प्रतिनिधिमंडल ने संपत्ति के उत्तराधिकार और विरासत के विषय पर कहा कि संपत्ति के स्वामी को वसीयत करने का अधिकार पहले से प्राप्त है। वहीं, वसीयत न होने की स्थिति में संपत्ति का बंटवारा लागू उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार होता है। प्रतिनिधिमंडल का मत था कि यदि समान नागरिक संहिता के अंतर्गत उत्तराधिकार संबंधी व्यवस्था में बेटे बेटियों को संपत्ति का समान अधिकार देने की बात की जा रही है तो इसमें यह भी विचार करना आवश्यक है बेटी की शादी में दिया गया स्त्रीधन किस गिनती में आएगा ? क्योंकि प्रचलित मान्य नियमों के तहत बेटी की शादी में दिया गया स्त्री धन एक प्रकार से विवाह के समय आशिक बटवारा माना जाता है, ऐसे में बिना वसीयत वाली संपत्ति में विवाह शुदा बेटी का हिस्सा अनुपात में कम होना चाहिए। छत्तीसगढ़ सिख समाज का मानना है कि विवाहित बेटी को माता-पिता दोनों की मृत्यु के बाद बिना वसीयत वाली संपत्ति में से कुछ प्रतिशत संपत्ति मिलना चाहिए।

*लिव - इन संबंधों के प्रावधान पर छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज की कड़ी असहमति*

    छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा ने चर्चा के दौरान कहा कि समाज समान नागरिक संहिता के 13 में से 11 बिंदुओं से सहमत है, लेकिन अंतिम दो बिंदुओं को लेकर अपनी असहमति व्यक्त करता है। उन्होंने विशेष रूप से लिव-इन संबंधों से संबंधित प्रावधान को हटाने की मांग की। उनका कहना है कि जब समाज लिव इन संबंधों का विरोध कर रहा है तो लाइव इन संबंधों में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के प्रावधान एवं लीव इन संबंधों के दौरान जन्मे बच्चों के उत्तराधिकार एवं भरण पोषण अधिकारों की सुरक्षा के विषय पर कोई बात कैसे की जा सकती है ? सिंघोत्रा ने कहा कि भारतीय समाज की पारिवारिक व्यवस्था, सामाजिक मर्यादाओं और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिव-इन संबंधों को प्रोत्साहित करने वाली किसी भी व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार ऐसे संबंधों की आड़ में युवतियों के भावनात्मक तथा शारीरिक शोषण, धोखाधड़ी और प्रताड़ना की आशंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि “हमारी मांग है कि समान नागरिक संहिता के द्वारा संविधान एवं केंद्रीय कानून से लिव-इन संबंधों से संबंधित प्रावधान को हटाया जाए। युवक-युवतियों के सम्मान, सुरक्षा, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि जब तक लिव इन संबंध कानूनी रूप से प्रतिबंधित नहीं होता तब तक लिव-इन संबंधों के मामले में किसी भी प्रकार के शोषण, धोखाधड़ी अथवा प्रताड़ना को रोकने के लिए प्रभावी कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

      प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर किसी भी निर्णय से पहले उसके सभी प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाई जानी चाहिए। विवाह, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे विषयों पर मौजूदा कानूनों तथा प्रस्तावित प्रावधानों के बीच अंतर स्पष्ट किया जाना आवश्यक है, ताकि समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

     समान नागरिक संहिता यूनिफॉर्म सिविल कोड समिति के सदस्यों एम.के. राउत, मोहन पवार एवं ज्योति रानी सिंह ने छत्तीसगढ़ सिख समाज के प्रतिनिधि मंडल को बताया कि छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यूनिफॉर्म सिविल कोड के अंतर्गत लागू किए जाने वाले प्रस्तावित प्रावधानों में विवाह तलाक भरण पोषण उत्तराधिकार विरासत संपत्ति बटवारा और लिव इन संबंधों से संबंधित विषयों के अलावा किसी भी समाज के अन्य किसी भी विषय - नियमों में कोई बदलाव की कोई योजना नहीं है।

    बैठक में सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, नरेंद्र सिंह हरगोत्रा एवं स्वर्ण सिंह चावला ने छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज की ओर से अपने विचार रखते हुए समिति के सदस्यों के समक्ष अपनी सहमति, असहमति और सुझाव प्रस्तुत किए। छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज ने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता के संबंध में समाज की राय संबंधित प्रावधानों के अध्ययन और सामाजिक हितों के आधार पर रखी जा रही है। समाज की प्राथमिकता पारिवारिक व्यवस्था की मजबूती, महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक मर्यादाओं तथा कानून के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है।

    समान नागरिक संहिता यूनिफॉर्म सिविल कोड समिति के सदस्यों एम.के. राउत, मोहन पवार एवं ज्योति रानी सिंह एवं छत्तीसगढ़ सिख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा ने छत्तीसगढ़ के सभी समाज प्रमुखों से अनुरोध किया है कि वे समिति द्वारा जारी किए गए लिंक, ईमेल एवं पत्र के माध्यम से समान नागरिक संहिता यूनिफॉर्म सिविल कोड के विषय पर अपने-अपने विचार - सुझाव आवश्यक रूप से भेज कर कानूनी प्रक्रिया के सहयोगी बने।