महिला उत्पीड़न से संबंधित 34 प्रकरणों को सुनवाई हेतु रखा, जिसमें 23 प्रकरणों की सुनवाई की गई व 08 प्रकरण नस्तीबध्द किये गये।

महिला उत्पीड़न से संबंधित 34 प्रकरणों को सुनवाई हेतु रखा, जिसमें 23 प्रकरणों की सुनवाई की गई व 08 प्रकरण नस्तीबध्द किये गये।

रायपुर/08 सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. ममता साहू ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर मे महिला उत्पीड़न से संबंधित 34 प्रकरणों को सुनवाई हेतु रखा, जिसमें 23 प्रकरणों की सुनवाई की गई व 08 प्रकरण नस्तीबध्द किये गये। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. ममता साहू की अध्यक्षता मे प्रदेश स्तर पर आज पांचवी सुनवाई हुई। रायपुर जिले मे चैथी जनसुनवाई।
आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि अनावेदक ने उसे शादी का झांसा दिया और उसका शारीरिक शोषण किया है। आवेदिका के विवाह करने के लिए कहने पर अनावेदक द्वारा उसे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। आयोग द्वारा संबंधित थाना को न्यायोचित कार्यवाही की जाने के लिए निर्देशित किया।
एक अन्य प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि अनावेदक उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। अनावेदक(पति) डेढ़ साल से अन्य महिला को दूसरी पत्नी बनाकर अलग रह रहा है। अनावेदक द्वारा आवेदिका व उसकी बेटी से कोई संपर्क नही रखा गया है और ना ही कोई भरण-पोषण दिया जा रहा है। जिससे आवेदिका परेशान है। प्रकरण को विस्तार से सुना गया व आवेदिका को न्यायालय जाने की सलाह दी गई। प्रकरण के समुचित निपटारा या समाधान होने तक निगरानी मे रखा जायेगा।
अन्य एक प्रकरण मे अनावेदक ने आवेदिका से विवाह समाप्ति और घर वापस ना आने की बात कहकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। आज की सुनवाई के दौरान अनावेदक अनुपस्थित रहा। आयोग द्वारा अनावेदक की उपस्थिति हेतु रायगढ़ पुलिस अधीक्षक को पत्र प्रेषित किये जाने का आदेश दिया जिससे आवेदिका के प्रकरण का निराकरण किया जा सके।
एक प्रकरण मे आवेदिका ने भरण-पोषण हेतु शिकायत दर्ज करायी थी। सुनवाई के दौरान आवेदिका ने बताया कि अनावेदक का दूसरी महिला से अवैध संबंध है। जिसके चलते अनावेदक द्वारा आवेदिका और उसके बच्चों का भरण-पोषण नहीं किया जाता है। आवेदिका ने बताया कि अनावेदक जेल मे है और दूसरी महिला के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करवाया गया था लेकिन उसका नाम दर्ज नही किया गया। आयोग द्वारा विस्तार से सुना गया व एसपी रायपुर को प्रकरण की जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किये जाने का आदेश दिया गया।

एक अन्य प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि अनावेदिका ने उसके बेटे को बिना शादी किये साथ मे रखा है। दोनो पक्षों को सुना गया। दोनो पक्षों के बीच झगडे व मारपीट होती है। दोनो पक्षो का साथ रहना संभव नही होने की स्थिति मे पृथ्य-पृथ्क किराये के मकान मे रहने हेतु निर्देश दिया गया।
समाजिक बहिष्कार के प्रकरण मे अनावेदकगणों केा आवेदिकागणो को समाज मे शामिल करने तथा गलत तरीके से लगाये  गये दंड को हटाने हेतु निर्देशित किया गया।