भलाई स्टील प्लांट से ₹10 हजार करोड़ की कथित लोहा चोरी पर भाजपा विधायक के सवाल, सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न*

भलाई स्टील प्लांट से ₹10 हजार करोड़ की कथित लोहा चोरी पर भाजपा विधायक के सवाल, सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न*

भलाई स्टील प्लांट से ₹10 हजार करोड़ की कथित लोहा चोरी पर भाजपा विधायक के सवाल, सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न*

भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र से पिछले कई दशकों में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के लोहा चोरी होने के भाजपा विधायक राकेश सेन के दावे ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक राकेश सेन ने इस मामले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय इस्पात मंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर कथित लोहा चोरी की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

विधायक सेन ने दो दिन पहले सोशल मीडिया पर प्रदेश के डीजीपी अरुण देव गौतम को सीधे संबोधित करते हुए भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अपने पोस्ट में दावा किया कि भिलाई इस्पात संयंत्र से पिछले लगभग 40 वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये का लोहा चोरी हुआ है। उन्होंने पुलिस के सामने कई बिंदु रखते हुए पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग की है।

हालांकि, ₹10 हजार करोड़ की चोरी और अन्य लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। परन्तु विधायक रिकेश सेन ने सार्वजनिक रूप से यह आरोप लगाए हैं , ऐसे में यह मामला जांच का विषय है और यदि आरोप सही हैं तो यह केवल चोरी का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संपत्ति और सार्वजनिक क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा।

भाजपा की सरकार में भाजपा विधायक को क्यों उठानी पड़ रही है आवाज?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उठता है।

छत्तीसगढ़ में इससे पहले लगभग 15 वर्षों तक भाजपा की सरकार रही और डॉ. रमन सिंह लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद पांच वर्षों तक कांग्रेस की सरकार रही। वर्तमान में भी लगभग तीन वर्षों से भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लगातार पारदर्शी और जवाबदेह शासन की बात करते रहे हैं।

ऐसे में सवाल यह है कि यदि भाजपा के ही एक निर्वाचित विधायक को भिलाई इस्पात संयंत्र से कथित हजारों करोड़ रुपये की लोहा चोरी के मामले को लेकर मुख्यमंत्री, गृह मंत्री से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय इस्पात मंत्री और प्रधानमंत्री तक पत्र लिखना पड़ रहा है, तो स्थानीय और राज्य स्तर की व्यवस्था अब तक इस मामले में क्या कर रही थी?

यदि विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया भी तथ्य हैं, तो संबंधित एजेंसियों को स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू करनी चाहिए। वहीं यदि आरोप तथ्यहीन हैं, तो सरकार और पुलिस को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

डीजीपी से विधायक की सीधी अपील

विधायक राकेश सेन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में डीजीपी अरुण देव गौतम से सीधे कार्रवाई की अपील करते हुए कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन वाहनों का इस्तेमाल कथित रूप से चोरी में होता था, उनमें से 100 से अधिक वाहनों को रातों-रात काट दिया गया।

उन्होंने पुलिस को सुझाव दिया कि ऐसे वाहनों का रिकॉर्ड आरटीओ से लेकर उनके मालिकों तक पहुंचा जा सकता है और उसके आधार पर कथित चोरी के नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई जा सकती है।

*विधायक ने भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों की भूमिका, स्क्रैप टेंडर से निकलने वाले माल के वजन और जांच व्यवस्था, सीआईएसएफ की निगरानी तथा ट्रांसपोर्ट यूनियन से जुड़े कथित आर्थिक लेन-देन सहित कई बिंदुओं की जांच की मांग की है।*

इन सभी आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही सामने आ सकती है, लेकिन इतने गंभीर आरोपों के बाद जांच होना और उसकी स्थिति सार्वजनिक होना निश्चित रूप से जरूरी है।

विधायक का एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि दुर्ग पुलिस द्वारा अब तक लोहा चोरी के मामले में जिन लोगों को पकड़ा गया है, क्या जांच केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित है या इसके पीछे मौजूद कथित बड़े नेटवर्क तक भी पहुंची है?

यदि कोई संगठित गिरोह लंबे समय तक राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाता रहा है, तो जांच का उद्देश्य केवल चोरी के दौरान पकड़े गए लोगों तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि चोरी का माल कहां जाता था, कौन खरीदता था, किन माध्यमों से उसका परिवहन होता था और पूरे नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी।

विधायक ने अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया है कि एक भाजपा मंडल पदाधिकारी को कार्रवाई के दायरे में लाकर पूरे मामले को भाजपा से जोड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने इस पर भी पुलिस से स्पष्टीकरण की मांग की है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी आरोपी की राजनीतिक पहचान जांच का आधार नहीं होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध के पर्याप्त साक्ष्य हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो उसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

इसी तरह किसी राजनीतिक दल या सरकार को बदनाम करने के आरोप भी प्रमाणित तथ्यों के आधार पर ही लगाए जाने चाहिए।

इस पूरे मामले ने मुख्यमंत्री, गृह विभाग और छत्तीसगढ़ पुलिस के सामने एक सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या ₹10 हजार करोड़ की कथित लोहा चोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?

यदि आरोप गलत हैं तो सरकार को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि आरोपों में दम है तो जिम्मेदार लोगों तक जांच पहुंचनी चाहिए, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों।

भिलाई इस्पात संयंत्र केवल भिलाई की पहचान नहीं, बल्कि देश की औद्योगिक विरासत और राष्ट्रीय संपत्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए यहां कथित चोरी का मामला किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच निष्पक्ष हो, राजनीतिक प्रभाव से मुक्त हो और परिणाम जनता के सामने आए।

भाजपा विधायक रिकेश सेन ने फेसबुक पोस्ट में सीधा आरोप लगाया है कि आईपीएस अधिकारी सरकार को बदनाम करने के तहत रणनीति बना कर काम कर रहे हैं |

विधायक रिकेश सेन ने यह मुद्दा उठाकर सरकार और पुलिस के सामने चुनौती रख दी है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री, गृह विभाग और पुलिस इस चुनौती को किस रूप में लेते हैं—जांच शुरू करके सच्चाई सामने लाते हैं या फिर यह मामला भी आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाता है। cg24news.in