बस्तर में बारिश और बाढ़ से तबाही मुख्यमंत्री का दौरा केवल खानापूर्ति -दीपक बैज

बस्तर में बारिश और बाढ़ से तबाही मुख्यमंत्री का दौरा केवल खानापूर्ति -दीपक बैज

बस्तर में बारिश और बाढ़ से तबाही मुख्यमंत्री का दौरा केवल खानापूर्ति -दीपक बैज

भाजपा की बेरुखी, बस्तर से सरगुजा तक जनता पानी में, सरकार आराम में
 प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज
 ने कहा कि बस्तर संभाग का अधिकांश हिस्सा बारिश और बाढ़ के कारण तबाह हो चुका है। बस्तर संभाग के 571 गांव बाढ़ से पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। 22 हजार से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में आये है। 8 लोगों की मौतें भी हुई है। लोगों के घर, घर के सामान राशन सामग्री, कॉपी-किताब, दस्तावेज सब बर्बाद हो गया है। इस बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में सरकार के द्वारा जिस मुस्तैदी से राहत और बचाव कार्य किया जाना चाहिए वह नहीं दिखा। मुख्यमंत्री कल एक दिन के बस्तर और सुकमा प्रवास पर गये लेकिन उनका दौरा भी केवल खानापूर्ति रहा। मुख्यमंत्री प्रभावित परिवारों को केवल 10 हजार की सहायता राशि घोषित करके आये, यह तो एसडीएम और तहसीलदार भी कर सकते थे। मुख्यमंत्री से बस्तरवासियों को उम्मीद थी की कुछ ठोस घोषणा करेंगे लेकिन उन्होंने निराश किया। हमारी मांग है सरकार बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता और क्षेत्र के पुल-पुलिया, सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए विशेष राहत पैकेज दें। पिछले वर्ष भी बारिश की तबाही से बस्तर के अनेकों पुल-पुलिया टूट गये थे, सड़कें बह गयी थी, वे अभी तक नहीं बनी है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मुख्यमंत्री साय, हर साल बाढ़ में बस्तर सिर्फ फोटो खिंचवाने आते हैं फिर पीड़ितों को उनके हाल में छोड़कर भूल जाते हैं, पिछले साल के आपदा राहत के अधूरे काम कब पूरे करेंगे? 2025 की बाढ़ में सड़कें, पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हुए थे, तब जल्द मरम्मत और पुनर्निर्माण का भरोसा दिया गया था, लेकिन एक साल बाद भी यह पूरी सड़क टूटी पड़ी है। पिछले साल बाढ़ में बहे सड़क को ही बनवा दीजिए सरकार, ताकि यहां के ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा मिल सके।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार की अकर्मण्यता से आम जनता के स्वास्थ्य का खतरा मंडरा रहा है, बारिश के बाद जलजनित बीमारियों डेंगी, मलेरिया, डायरिया का खतरा मंडरा रहा है। भाजपा की बेरुखी से बस्तर से सरगुजा तक जनता पानी में है और सरकार आराम में। छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों की गाढ़ी कमाई से टैक्स लेकर उन्हें नारकीय जीवन जीने के लिए छोड़ दिया गया है। मुख्यमंत्री और मंत्री केवल समीक्षा बैठकों की फोटो खिंचवा रहे हैं, धरातल पर राहत नगण्य है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि मानसून से ठीक पहले प्रदेश भर के निकायों में नालों और जल निकासी की सफाई के लिए कितना बजट जारी हुआ और उसमें से असल में कितना काम धरातल पर हुआ? राजधानी रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरों में ‘स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत जल निकासी सुधारने के नाम पर खर्च किए गए सैकड़ों करोड़ रुपये आखिर किस नाली में बह गए? जिन आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों और गरीबों के घरों में पानी घुसने से भारी नुकसान हुआ है, क्या सरकार उन्हें तत्काल मुआवजा देने की घोषणा करेगी? मानसून पूर्व की तैयारियों में लापरवाही बरतने वाले अफसरों और भ्रष्ट ठेकेदारों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई? शहरों में जलभराव के बाद अब डेंगी, मलेरिया और डायरिया जैसी महामारियों का खतरा बढ़ गया है, इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग का क्या ठोस प्लान है?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार का ‘स्मार्ट सिटी’ और ‘जल निकासी प्रबंधन’ का दावा बारिश के पहले ही झोंके में बह गया। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और रायगढ़ जैसे प्रमुख शहर जरा सी बारिश में टापू बन गए। नालों की सफाई के नाम पर केवल कागजी औपचारिकता पूरी की गई। इस सरकार की नीतिगत कमियों और प्रशासनिक लापरवाही की वजह से हालात बदतर हो चुके हैं। मानसून पूर्व नालों की सफाई में भारी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही हुई। नगरीय प्रशासन विभाग और निकायों के बीच कोई समन्वय नहीं दिखा। बजट का सही उपयोग नहीं हुआ और जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों के लिए कोई इमरजेंसी प्लान तैयार नहीं किया गया। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान मानसून पूर्व व्यापक सफाई अभियान चलाया जाता था, कंट्रोल रूम 24ग7 सक्रिय रहते थे और जलभराव वाले क्षेत्रों में त्वरित पंपिंग सिस्टम से पानी की निकासी सुनिश्चित की जाती थी। वर्तमान भाजपा सरकार के राज में नाले जाम है और जनजीवन अस्त-व्यस्त।